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मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है . By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब,सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है -2 मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है . सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है. मैने जीवन बिताना है -2 सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है. सतगुरु की बगिया का बन कर मैं फूल रहूँ. बन कर मैं फूल रहूँ. दाता के चरणों की बन कर मैं धुल रहूँ. बन कर मैं धुल रहूँ . चरणों की धूलि को मस्तक पे लगाना है. मस्तक पे लगाना है इसे अपना बनाना है. मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है, मेरे दाता का दर ही मेरा असली ठिकाना है . मेरे सतगुरु ने हमको जीना सिखलाया है. श्री आरती पूजा और सत्मार्ग दिखाया है. दरबार से हमको मिला ये असली खजाना है, ये असली खजाना है भक्ति का खजाना है. सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है. दिल की हर धड़कन मैं तेरा ही नाम रहे . मुझको दिन रात प्रभु बस तेरा ध्यान रहे . इन आँखों ने केवल तेरा दर्शन पाना है. तेरा दर्शन पाना है, तेरा धयान लगाना है. इन आँखों ने केवल तेरा दर्शन पाना है . सतगुरु के चरणों में मैने जीवन बिताना है . मैं तेरी रहूँ दाता तुम मेरे कहलाओ . इस द्वारे पे खड़ी रहूँ तुम सदा नजर आओ . इस दासी ने तुझको ही बस आपना बनाया है. बस आपना बनाया है -आँखों में तेरा ही बस तेरा रूप बसाया है. मैने रूप बसाया है , चरणों की धूलि को मस्तक पे लगाना है . दरबार से हमको मिला ये भक्ति का खजाना है . भक्ति का खजाना है, कहीं और न जाना है . दाता तेरे चरणों में मैने जीवन बिताना है . मेरे सतगुरु का दर ही मेरा असली ठिकाना है . इस दासी ने तुझको ही बस आपना बनाया है . आँखों में तेरा ही बस ही तेरा रूप बसाया है.,
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