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फुला वाली पालकी च मेरे गुरु जी आये ने, By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब, संगता ने हाथ जोड़े शीश झुकाये ने, फुला वाली पालकी च मेरे गुरु जी आये ने, सतगुरु दी वाणी वंडे चानन जहान नु, सच दा सुनेहा दिंडी हर इंसान नु, तेरे मेरे वाले सारे भरम गवाए ने, फुला वाली पालकी च मेरे गुरु जी आये ने, हर इक हिरदये अंदर जग मग हो रहियाँ, नाम दी खुमारी विच संगता ने खो रहियाँ, लोक परलोक विच खुशियां दे नजारे ने, फुला वाली पालकी च मेरे गुरु जी आये ने, गुरु दी प्यारी संगता बड़े मंदिर आ रहियाँ, कीर्तन वारा रही शब्द्द सुना रहियाँ, धन हो गए गुरु सिख जिह्ना दर्शन पाए ने, फुला वाली पालकी च मेरे गुरु जी आये ने.,
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