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साधक की उंगलियाँ माला के ऊपर नृत्य करती हैं। भक्त के कान कीर्तन सुनते हुये नृत्य करें , जीभ हरि -कीर्तन करती हुई नृत्य करे और मन व उंगली राम नाम की माला जपते रहें। राम -नाम के जपने वाले काल को भी हनन कर डालते हैं। यह भाव ऊंचा और श्रेष्ठ है। राम भक्त का नाश कभी नहीं होता। यदि अवधि पूरी हो गई है , तो भले ही शरीर छूटे। निर्भयता , निडरता होनी चाहिये , तब लाभ होता है। मनोबल , वाणीबल बढता जाता है। यह साधन बड़ा लाभदायक है।(By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब),
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