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मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे, By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब, जाके अपने गुरु जी न मना लेंदे, मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे, अपने करुण न बाहर छोड़ दे जा, दिल नाल गुरु दी शरण विच जा, नूर आसमानी जिद्दी दुनिया दीवानी, तनु सब कुछ मिलेगा तू देख्दा जा, मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे, सच्चा रिश्ता गुरु जी नाल बना ले, मंग न तू ओहना नू मना लै, ओह अंतर्यामी नूरा वाले नूरानी, तेरे कष्ट हरे गे तू हर लें दे, मैनु रोक ना गुरु दे दर जा लें दे, हूँ फ़िक्र न कर नाही रोना, हूँ ते कुछ भी नहीं खोना, जदो नाल है गुरु जी फिर चिंता किस गल दी, ओहना नू ही सब कुछ संभाल लें दे, ॐ नामय शिवाये शिव जी सदा सहाये.
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