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बाल वनिता महिला आश्रम

2021 हो या कोई भी साल मोटापा घटाने के तरीके कभी बदलते थोड़े हैं। तो आइए मोटापा घटाने के तरीकों के बारे में बात करते हैं।मोटापा कम करने के किए भोजन पर नियंत्रण बहुत आवश्यक हैं। भोजन की मात्रा और समय का शरीर पर बहुत प्रभाव पड़ता है। आवश्यकता से अधिक और असमय खाना मोटापा लाता है। इसलिए समय और खाना खाए और अत्यधिक नहीं खाए।

खाने के तुरंत बाद कभी सोए नहीं। खाना खाने के बाद कुछ कदम अवश्य। जले। इससे खाने को पचने में आसानी होती है। जिससे मोटापा नहीं आता।

खाने के बीचमे पानी ना पिएं। इससे मोटापा बढ़ता है। खाना खाने के आधा घंटे बाद पानी पिए। इससे भोजन अच्छे से पचता है। जिससे मोटापा नहीं आता।

मोटापा काम करने के किए योगा और व्यायाम भी बहुत आवश्यक है। मोटापा काम करने के किए बहुत से व्यायाम हैं आप यूट्यूब पर आसानी से देख सकते हैं। व्यायाम को नित्य रूप से करने से मोटापा और अनावश्यक चर्बी कम हो जाती हैं।

मोटापा काम करने के लिए आप Garcinia combogia का सेवन कर सकते हैं। यह वजन काम करने के किए काफी कारगर रहता हैं। इसके नियमित सेवन से वजन को आसानी से कम किया जा सकता है।

ग्रीन टी वजन काम करने में बहुत लाभदायक है। रोजाना दो कप ग्रीन टी का सेवन करके वजन को आसानी से कम किया जा सकता है। ग्रीन टी शरीर से अनावश्यक गन्दगी को बाहर निकालकर शरीर को फिट और तंदुरुस्त रखता है।

इसके लिए यदि आप keto advance formula लेते है तो बहुत मदद मिलती है। यह शरीर की अनावश्यक चर्बी को बाहर निकालने में बहुत मदद करता है। इसके लिए आप Saint Ayurveda KETO-7x advanced formula का इस्तेमाल कर सकत हैं। इसमें Garcinia combogia,green tea,green coffee bean,shush gugule शामिल हैं। जी शरीर की अनावश्यक चर्बी को जल्दी से जलाने में मदद करता है।


जलाने का सुनकर घबरा मत जाना। जलना मतलब चर्बी कम करने में मदद करता है।आप इसका नियमित रूप से सेवन करके मोटापे को काम कर सकते हैं।

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साधक की उंगलियाँ माला के ऊपर नृत्य करती हैं। भक्त के कान कीर्तन सुनते हुये नृत्य करें , जीभ हरि -कीर्तन करती हुई नृत्य करे और मन व उंगली राम नाम की माला जपते रहें। राम -नाम के जपने वाले काल को भी हनन कर डालते हैं। यह भाव ऊंचा और श्रेष्ठ है। राम भक्त का नाश कभी नहीं होता। यदि अवधि पूरी हो गई है , तो भले ही शरीर छूटे। निर्भयता , निडरता होनी चाहिये , तब लाभ होता है। मनोबल , वाणीबल बढता जाता है। यह साधन बड़ा लाभदायक है।(By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब),

💖💖💖💖 ॐ सूर्य देवाय नमः 💖💖💖💖 🥀🌷🍀सुप्रभात स्नेह वंदन जी 🍀🌷🥀 💞💕आपका शुभ दिन मंगलमय हो 💕💞 🌼💐हंस और काग 💐🌼 एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे,एक गरीब था तो दूसरा अमीर..दोनों पड़ोसी थे..,,गरीब ब्राम्हण की पत्नी ,उसे रोज़ ताने देती , झगड़ती एक दिन ग्यारस के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र झगड़ों से तंग आ जंगल की ओर चल पड़ता है ,ये सोच कर कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मार कर खा जायेगा उस जीव का पेट भर जायेगा और मरने से वो रोज की झिक झिक से मुक्त हो जायेगा..।जंगल में जाते उसे एक गुफ़ा नज़र आती है...वो गुफ़ा की तरफ़ जाता है...। गुफ़ा में एक शेर सोया होता है और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा होता है..हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़ सोचता है..ये ब्राह्मण आयेगा ,शेर जगेगा और इसे मार कर खा जायेगा... ग्यारस के दिन मुझे पाप लगेगा...इसे बचायें कैसे???उसे उपाय सुझता है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते कहता है..ओ जंगल के राजा... उठो, जागो..आज आपके भाग खुले हैं, ग्यारस के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हे दक्षिणा दें रवाना करें...आपका मोक्ष हो जायेगा.. ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही आये,आपको पशु योनी से छुटकारा मिल जायेगा...।शेर दहाड़ कर उठता है,हंस की बात उसे सही लगती है,और पूर्व में शिकार हुए मनुष्यों के गहने थे वे सब के सब उस ब्राह्मण के पैरों में रख ,शीश नवाता है,जीभ से उनके पैर चाटता है..।हंस ब्राह्मण को इशारा करता है विप्रदेव ये सब गहने उठाओ और जितना जल्द हो सके वापस अपने घर जाओ...ये सिंह है.. कब मन बदल जाय..ब्राह्मण बात समझता है घर लौट जाता है.... पडौसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली ग्यारस को जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है....अब शेर का पहेरादार बदल जाता है..नया पहरेदार होता है ""कौवा""जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है ... बढीया है ..ब्राह्मण आया.. शेर को जगाऊं ...शेर की नींद में ख़लल पड़ेगी, गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा,तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा...ये सोच वो कांव.. कांव.. कांव...चिल्लाता है..शेर गुस्सा हो जगता है..दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है उसे हंस की बात याद आ जाती है.. वो समझ जाता है, कौवा क्यूं कांव..कांव कर रहा है..वो अपने, पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता..पर फिर भी नहीं शेर,शेर होता है जंगल का राजा...वो दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..""हंस उड़ सरवर गये और अब काग भये प्रधान...थे तो विप्रा थांरे घरे जाओ,,,,मैं किनाइनी जिजमान...,अर्थात हंस जो अच्छी सोच वाले अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़ के सरोवर यानि तालाब को चले गये है और अब कौवा प्रधान पहरेदार है जो मुझे तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है..मेरी बुध्दी घूमें उससे पहले ही..हे ब्राह्मण, यहां से चले जाओ..शेर किसी का जजमान नहीं हुआ है..वो तो हंस था जिसने मुझ शेर से भी पुण्य करवा दिया,दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है...कहने का मतलब है दोस्तों...ये कहानी आज के परिपेक्ष्य में भी सटीक बैठती है ,हंस और कौवा कोई और नहीं ,,,हमारे ही चरित्र है...कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है और उसका भला सोचता है ,,,वो हंस है...और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है ,,,किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता ...वो कौवा है...जो आपस में मिलजुल,भाईचारे से रहना चाहते हैं ,वे हंस प्रवृत्ति के हैं..जो झगड़े कर एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के है...*कार्यालय में ,व्यवसाय में ,समाज मे या किसी संगठन में हो जो किसी सहयोगी साथी की गलती या कमियों को बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, उसको हानि पहुचाने के लिए उकसाते हैं...वे कौवे जैसे है..और जो किसी सहयोगी ,साथी की गलती, कमियों पर भी विशाल ह्रदय रख कर अनदेखी करते हुए क्षमा करने को कहते हैं ,वे हंस प्रवृत्ति के है..।अपने आस पास छुपे बैठे कौवौं को पहचानों, उनसे दूर रहो ...और जो हंस प्रवृत्ति के हैं , उनका साथ करो.. इसी में आपका व हम सब का कल्याण छुपा है!!🙏🌹जय श्री सूर्य देव जी 🌹🙏

प्रथम तुला वंदितो कृपाडा लिरिक्स,,प्रथम तुला वंदितो कृपाडा , गजानना गणराया...विघ्न विनाशक गुणिजन पालक दुरित तिमिर हारका सुख कारक तू दुःख विदारक तूच तुझा सारखा वक्रतुंड ब्रम्हांडनायकाविनायका प्रभुराया सिद्धि विनायक तूच अनंता शिवात्म्जा मंगला सिन्दुरवदना विध्याधिशा गणाधिपा वत्सला तूच ईश्वरा साह्य करावे हा भव सिन्धु तरया गज वदना तव रूप मनोहर शुक्लाम्बर शिव सुता चिंतामणि तू अष्टविनायक सक्लांची देवता रिद्धिसिद्धि चा वरा दयाडा देई कृपे ची छाया

प्रथम तुला वंदितो कृपाडा लिरिक्स ,, प्रथम तुला वंदितो कृपाडा ,  गजानना गणराया... विघ्न विनाशक गुणिजन पालक  दुरित तिमिर हारका  सुख कारक तू दुःख विदारक   तूच तुझा सारखा  वक्रतुंड ब्रम्हांडनायका विनायका प्रभुराया  सिद्धि विनायक तूच अनंता  शिवात्म्जा मंगला  सिन्दुरवदना विध्याधिशा  गणाधिपा वत्सला   तूच ईश्वरा साह्य करावे  हा भव सिन्धु तरया  गज वदना तव रूप मनोहर  शुक्लाम्बर शिव सुता  चिंतामणि तू अष्टविनायक  सक्लांची देवता  रिद्धिसिद्धि चा वरा दयाडा   देई कृपे ची छाया