सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

By social worker Vanita Kasani Punjab Support CenterAjay Shri Ramajay Shri HanumanShri Hanuman Chalisa... Jai Shri Sitaram Ji.By social worker Vanita Kasani Punjab4Doha:Sriguru Charan Saroj Raj




श्री हनुमान चालीसा


।। जय श्री सीताराम जी ।।






दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।



🔔अब आप राम नाम लिख सकते है अपनी मनपसंद रामनाम धुन और बैकग्राउंड फोटो के साथ | सेटिंग्स पेज पे भजन और बैकग्राउंड अपलोड कर सकते है 🔔
 
 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

💖💖💖💖 ॐ सूर्य देवाय नमः 💖💖💖💖 🥀🌷🍀सुप्रभात स्नेह वंदन जी 🍀🌷🥀 💞💕आपका शुभ दिन मंगलमय हो 💕💞 🌼💐हंस और काग 💐🌼 एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे,एक गरीब था तो दूसरा अमीर..दोनों पड़ोसी थे..,,गरीब ब्राम्हण की पत्नी ,उसे रोज़ ताने देती , झगड़ती एक दिन ग्यारस के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र झगड़ों से तंग आ जंगल की ओर चल पड़ता है ,ये सोच कर कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मार कर खा जायेगा उस जीव का पेट भर जायेगा और मरने से वो रोज की झिक झिक से मुक्त हो जायेगा..।जंगल में जाते उसे एक गुफ़ा नज़र आती है...वो गुफ़ा की तरफ़ जाता है...। गुफ़ा में एक शेर सोया होता है और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा होता है..हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़ सोचता है..ये ब्राह्मण आयेगा ,शेर जगेगा और इसे मार कर खा जायेगा... ग्यारस के दिन मुझे पाप लगेगा...इसे बचायें कैसे???उसे उपाय सुझता है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते कहता है..ओ जंगल के राजा... उठो, जागो..आज आपके भाग खुले हैं, ग्यारस के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हे दक्षिणा दें रवाना करें...आपका मोक्ष हो जायेगा.. ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही आये,आपको पशु योनी से छुटकारा मिल जायेगा...।शेर दहाड़ कर उठता है,हंस की बात उसे सही लगती है,और पूर्व में शिकार हुए मनुष्यों के गहने थे वे सब के सब उस ब्राह्मण के पैरों में रख ,शीश नवाता है,जीभ से उनके पैर चाटता है..।हंस ब्राह्मण को इशारा करता है विप्रदेव ये सब गहने उठाओ और जितना जल्द हो सके वापस अपने घर जाओ...ये सिंह है.. कब मन बदल जाय..ब्राह्मण बात समझता है घर लौट जाता है.... पडौसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली ग्यारस को जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है....अब शेर का पहेरादार बदल जाता है..नया पहरेदार होता है ""कौवा""जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है ... बढीया है ..ब्राह्मण आया.. शेर को जगाऊं ...शेर की नींद में ख़लल पड़ेगी, गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा,तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा...ये सोच वो कांव.. कांव.. कांव...चिल्लाता है..शेर गुस्सा हो जगता है..दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है उसे हंस की बात याद आ जाती है.. वो समझ जाता है, कौवा क्यूं कांव..कांव कर रहा है..वो अपने, पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता..पर फिर भी नहीं शेर,शेर होता है जंगल का राजा...वो दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..""हंस उड़ सरवर गये और अब काग भये प्रधान...थे तो विप्रा थांरे घरे जाओ,,,,मैं किनाइनी जिजमान...,अर्थात हंस जो अच्छी सोच वाले अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़ के सरोवर यानि तालाब को चले गये है और अब कौवा प्रधान पहरेदार है जो मुझे तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है..मेरी बुध्दी घूमें उससे पहले ही..हे ब्राह्मण, यहां से चले जाओ..शेर किसी का जजमान नहीं हुआ है..वो तो हंस था जिसने मुझ शेर से भी पुण्य करवा दिया,दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है...कहने का मतलब है दोस्तों...ये कहानी आज के परिपेक्ष्य में भी सटीक बैठती है ,हंस और कौवा कोई और नहीं ,,,हमारे ही चरित्र है...कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है और उसका भला सोचता है ,,,वो हंस है...और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है ,,,किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता ...वो कौवा है...जो आपस में मिलजुल,भाईचारे से रहना चाहते हैं ,वे हंस प्रवृत्ति के हैं..जो झगड़े कर एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के है...*कार्यालय में ,व्यवसाय में ,समाज मे या किसी संगठन में हो जो किसी सहयोगी साथी की गलती या कमियों को बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, उसको हानि पहुचाने के लिए उकसाते हैं...वे कौवे जैसे है..और जो किसी सहयोगी ,साथी की गलती, कमियों पर भी विशाल ह्रदय रख कर अनदेखी करते हुए क्षमा करने को कहते हैं ,वे हंस प्रवृत्ति के है..।अपने आस पास छुपे बैठे कौवौं को पहचानों, उनसे दूर रहो ...और जो हंस प्रवृत्ति के हैं , उनका साथ करो.. इसी में आपका व हम सब का कल्याण छुपा है!!🙏🌹जय श्री सूर्य देव जी 🌹🙏

हैप्पी चॉकलेट डे गीत: ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा है...🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा है।ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। भाग्य-विधाता मिले हो और क्या पायें, भाग्य-विधाता मिले हो और क्या पायें। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। 🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰राहें दिखाई तुने, जीवन संवार दिया, राहें दिखाई तुने, जीवन संवार दिया। देके ज्ञान प्याला तुने प्यास को बुझाय दिया, देके ज्ञान प्याला तुने प्यास को बुझाय दिया।मंजिल दिखाई तुने क्या से क्या बनाय दिया, मंजिल दिखाई तुने क्या से क्या बनाय दिया। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। 🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰सेवा हो या हो आंगन एक तुम्हें पायें, सेवा हो या हो आंगन एक तुम्हें पायें। देख देख बाबा तेरी याद में खो जायें, देख देख बाबा तेरी याद में खो जायें। मन पपिहा झूम झूम एक गीत गाये, मन पपिहा झूम झूम एक गीत गाये। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। 🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰जब-जब सुनाईं ज्ञान बांसुरी सुरीली, जब-जब सुनाईं ज्ञान बांसुरी सुरीली।दोड़े गोपी ग्वाल लेके आंखें गीली-गीली, दोड़े गोपी ग्वाल लेके आंखें गीली-गीली।पल-पल तुम्हारे संग बैठूं संग खाऊं, पल-पल तुम्हारे संग बैठूं संग खाऊं।ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। भाग्य-विधाता मिले हो और क्या पायें। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं, ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं। 🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰

हैप्पी चॉकलेट डे गीत: ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा है... 🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰 ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं,       ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा है। ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं,       ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं।  भाग्य-विधाता मिले हो और क्या पायें,       भाग्य-विधाता मिले हो और क्या पायें।  ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं,       ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं।  ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं,       ओ प्यारे बाबा तूं कितना प्यारा हैं।  🌰🍬🍭🍫🍩🌰🍬🍭🍫🍩🌰 राहें दिखाई तुने, जीवन संवार दिया,       राहें दिखाई तुने, जीवन संवार दिया।  देके ज्ञान प्याला तुने प्यास को बुझाय दिया,       देके ज्ञान प्याला तुने प्यास को बुझाय दिया। मंजिल दिखाई तुने क्या से क्या बनाय दिया,       मंजिल दिखाई तुने क्या से क्या बनाय दिया।  ओ मीठे बाबा तूं कितना मीठा हैं,       ओ प्यारे बाबा त...

साधक की उंगलियाँ माला के ऊपर नृत्य करती हैं। भक्त के कान कीर्तन सुनते हुये नृत्य करें , जीभ हरि -कीर्तन करती हुई नृत्य करे और मन व उंगली राम नाम की माला जपते रहें। राम -नाम के जपने वाले काल को भी हनन कर डालते हैं। यह भाव ऊंचा और श्रेष्ठ है। राम भक्त का नाश कभी नहीं होता। यदि अवधि पूरी हो गई है , तो भले ही शरीर छूटे। निर्भयता , निडरता होनी चाहिये , तब लाभ होता है। मनोबल , वाणीबल बढता जाता है। यह साधन बड़ा लाभदायक है।(By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब),